ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भारत समेत कई अन्य मित्र देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz Open) से गुजरने की अनुमति दे दी है। मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने एक पोस्ट में बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि, “हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है।
ईरान की तरफ से ये एलान संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उन टिप्पणियों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज को खोलने की बात कही थी।
क्या होगा भारत को फायदा?
हॉर्मुज का खुला रहना भारत के लिए जरूरी और फायदेमंद है, क्योंकि इस रूट के जरिए मध्य-पूर्व से रोज 2.5–2.7 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) भारत आता है। इनकी स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो, इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुला रहना जरूरी है।
सप्लाई होगी स्थिर
कई दिनों से एलपीजी की किल्लत को लेकर चर्चा चल रही थी। हालांकि सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में बताया। मगर अब जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल जाएगा, तो भारत में तेल-गैस की आपूर्ति सामान्य तरीके से हो सकेगी। इससे एलपीजी वितरण भी बेहतर होगा और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की अटकलों पर विराम लगेगा।
ईरानी मिशन ने किया था बड़ा एलान
इससे पहले 25 मार्च को, न्यूयॉर्क में ईरानी मिशन ने कहा था कि वे होर्मुज से उन जहाजों को गुजरने की अनुमति देंगे जिन्हें उसने “गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज” कहा।
मिशन ने X पर एक पोस्ट में एलान किया था कि, “गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज—जिनमें अन्य देशों से संबंधित या उनसे जुड़े जहाज भी शामिल हैं—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित मार्ग का लाभ उठा सकते हैं; बशर्ते कि वे ईरान के खिलाफ आक्रामकता की किसी भी कार्रवाई में न तो हिस्सा लें और न ही उसका समर्थन करें, और घोषित सुरक्षा व संरक्षा नियमों का पूरी तरह से पालन करें। यह सुविधा सक्षम ईरानी अधिकारियों के समन्वय से उपलब्ध होगी।”





