डोनाल्ड ट्रंप की मांगें लगातार बदलती रही हैं। उन्होंने कभी यह दावा किया कि ईरान ‘पूरी तरह हार चुका है’ तो कभी यह मांग की कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म कर दे और भविष्य में इसे आगे न बढ़ाने का वादा करे। ट्रंप ने यह भी कहा है कि वह चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण वह और ‘अगले अयातुल्ला’ मिलकर संभालें। वह यह भी चाहते हैं कि ईरान अपने मिसाइल उत्पादन को सीमित करे और भविष्य में सिर्फ रक्षात्मक कदम ही उठाए।
दिलचस्प बात यह है कि बाइडेन के पूर्व NSA जेक सुलिवन ने ‘द डेली शो विद जॉन स्टीवर्ट’ में शामिल होते हुए दावा किया कि ‘अमेरिकी वार्ताकार उस समझौते को ठीक से समझ ही नहीं पाए थे जिसका प्रस्ताव ईरान ने हमले से पहले दिया था। ओबामा प्रशासन के दौरान, सुलिवन ने अब्बास अराघची के साथ हुई वार्ताओं में हिस्सा लिया था। उस समय अराघची ईरान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।’ उन्होंने दावा किया कि ‘युद्ध से पहले ईरान ने अमेरिकी वार्ताकारों के सामने परमाणु मुद्दे को सुलझाने के लिए बड़ा प्रस्ताव रखा था जिसे अमेरिकी वार्ताकारों ने समझा ही नहीं।’
ईरान को युद्ध के बाद अब क्या चाहिए?
ईरान अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी चाहता है कि लड़ाई दोबारा शुरू नहीं होगी और भविष्य में वॉशिंगटन तेहरान पर हमला नहीं करेगा। ईरानी अधिकारी यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ उनके नियंत्रण में रहे और वे इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से अब शुल्क वसूलना चाहते हैं जैसा स्वेज नहर के मामले में हो रहा है। तेहरान यह भी चाहता है कि पूरे क्षेत्र में अमेरिका के सभी सैन्य अड्डे बंद कर दिए जाएं और अमेरिका, उसे जितना नुकसान हुआ है उसकी भरपाई करे। ईरान ने अपनी मांगों की लिस्ट भी जारी की है जिसे देखकर मुश्किल लगता है कि अमेरिका तैयार होगा।





