वेदांता समूह की कंपनी और भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट तेल एवं गैस एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन कंपनी, केयर्न ऑयल एंड गैस ने वेस्ट कोस्ट स्थित अपने एप्रेज़ल वेल अम्बे-2A में हाइड्रोकार्बन (गैस) खोज की सूचना डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स (DGH) और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को दी है। यह खोज मुख्य गैस फील्ड के नीचे स्थित रिज़रवॉयर में, मियोसीन-टारकेश्वर फॉर्मेशन के भीतर की गई है।
केयर्न वर्तमान में ब्लॉक के फील्ड डेवलपमेंट प्लान की संभावनाओं का आकलन करने के लिए विस्तृत मूल्यांकन कर रही है।
कंपनी अपने चल रहे ड्रिलिंग कैंपेन के तहत निरंतरता में दो अतिरिक्त कुएँ ड्रिल करने की योजना बना रही है। इस फील्ड में घरेलू गैस उत्पादन को बढ़ाने की मजबूत क्षमता है और यह भारत की एनर्जी आत्मनिर्भरता में केयर्न के योगदान को और सशक्त करेगी।
केयर्न अपनी एक्सप्लोरेशन और डेवलपमेंट रणनीति के तहत ईस्ट कोस्ट और वेस्ट कोस्ट दोनों क्षेत्रों में अपने ऑफशोर ब्लॉक्स का विकास कर रही है, जो माननीय प्रधानमंत्री के समुद्र मंथन मिशन के अनुरूप भारत के ऑफशोर रिज़र्व्स से उत्पादन को तेज़ करने की दिशा में एक अहम कदम है।
यह खोज भारत की एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में केयर्न की प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) एसेट्स कंपनी के उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ शैलो वॉटर ऑफशोर फील्ड्स के फास्ट-ट्रैक डेवलपमेंट और मोनेटाइज़ेशन में अहम भूमिका निभाएंगे।
हाल ही में केयर्न ने कंडक्टर सपोर्टेड प्लेटफॉर्म (CSP) इंस्टॉलेशन के तहत भारत का पहला सब-सी टेम्पलेट (SST) सफलतापूर्वक स्थापित किया है, जो DSF ब्लॉक्स में मार्जिनल फील्ड मोनेटाइज़ेशन के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। यह प्री-इंजीनियर्ड स्टील फाउंडेशन समुद्र तल पर स्थापित किया गया है ताकि क्लस्टर ड्रिलिंग के लिए सही पोज़िशनिंग और अलाइनमेंट सुनिश्चित हो सके, उपकरणों को स्ट्रक्चरल सपोर्ट मिले और वेलहेड्स की सुरक्षा हो सके।
728.19 वर्ग किलोमीटर में फैला अम्बे ब्लॉक सितंबर 2022 में DSF-III बिडिंग राउंड के तहत केयर्न को आवंटित किया गया था। इस ब्लॉक में पहली हाइड्रोकार्बन खोज केयर्न के पिछले कार्यकाल के दौरान की गई थी। कंपनी के पास इस ब्लॉक में 100% पार्टिसिपेटिंग इंटरेस्ट है।





