अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के नाम पर चीन और सहयोगी देशों से मदद की अपील की, लेकिन वह इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं। इसकी वजह यह है कि आस्ट्रेलिया और जापान ने नौसैनिक मदद मुहैया कराने से मना कर दिया है तो अन्य सहयोगी देशों ने भी कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है।
ब्रिटेन ने कहा कि वह ईरान युद्ध में नहीं पड़ेगा। इधर, ट्रंप ने यह चेतावनी दी है कि अगर सहयोगियों ने मदद नहीं की तो नाटो को भविष्य में संकट का सामना करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में दो सप्ताह से ज्यादा समय से जारी युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, क्योंकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है।
वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। एपी के अनुसार, ट्रंप ने फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटने के दौरान एयरफोर्स वन में रविवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने सात देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है, ताकि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखा जा सके। उन्होंने कहा, ‘मैं इन देशों से मांग करता हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।’
बहरहाल ईरान युद्ध के बीच तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद उनकी अपील पर किसी देश ने कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं जताई है। हालांकि ट्रंप ने उन देशों का नाम बताने से इनकार कर दिया, जो पश्चिम एशिया के कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं और जिनसे ट्रंप प्रशासन इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बनाने को लेकर वार्ता कर रहा है। उन्होंने केवल इतना कहा कि चीन लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी क्षेत्र से पाता है, जबकि अमेरिका को बहुत कम मात्रा में मिलता है।
इससे पहले उन्होंने एक इंटरनेट मीडिया पोस्ट कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इसमें शामिल होंगे।न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने उन देशों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिनसे उन्होंने होर्मुज में युद्धपोत भेजने की अपील की है।
उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा, ‘अगर कोई जवाब नहीं आता है या नकारात्मक जवाब आता है तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा।’
ट्रंप ने कहा कि खाड़ी की सुरक्षा के लिए चीन को भी मदद के लिए युद्धपोत भेजने चाहिए। रायटर के मुताबिक, जापान और आस्ट्रेलिया ने कहा कि वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों को एस्कार्ट करने के लिए पश्चिम एशिया में नौसैनिक पोत भेजने की योजना नहीं बना रहे।





