भारतीय रियल एस्टेट बाजार में कितनी भी तेजी का दावा किया जा रहा हो, लेकिन साल 2025 के आंकड़े कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे हैं. रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी प्रॉपटाइगर ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि देश के शीर्ष 8 प्रमुख शहरों में कुल आवासीय बिक्री 2025 में 12 फीसदी घटकर 3,86,365 यूनिट रही. यह अलग बात है कि प्रॉपर्टी की बढ़ी हुई कीमतों ने मूल्य के लिहाज से कम बिक्री के बावजूद इसमें ज्यादा गिरावट नहीं आने दी.
प्रॉपटाइगर ने बताया है कि साल 2025 की सबसे खास बात ये रही है कि आवासीय मकानों की बिक्री के मामले में दक्षिणी राज्यों ने उत्तर भारत के मुकाबले बाजी मारी है. दक्षिण के प्रमुख शहरों बैंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में पिछले साल आवासीय बिक्री 15 फीसदी बढ़कर 1.33 लाख यूनिट से अधिक रही. मुंबई स्थित सूचीबद्ध कंपनी ऑरम प्रॉपटेक द्वारा पिछले साल अधिग्रहीत प्रॉपटाइगर ने देश के 8 प्रमुख शहरों के प्राथमिक आवासीय बाजार के आंकड़े जारी किए.
किस शहर में ज्यादा रही बिक्री
आंकड़ों के अनुसार, सल 2025 में 8 प्रमुख शहरों में कुल आवासीय बिक्री 12 फीसदी घटकर 3,86,365 इकाई पर आ गई जो साल 2024 में 4,36,992 इकाई रही थी. इस दौरान मुंबई क्षेत्र, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), पुणे और अहमदाबाद में आवासीय बिक्री में गिरावट दर्ज की गई जबकि बैंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में बिक्री बढ़ी. ऑरम प्रॉपटेक के कार्यकारी निदेशक ओंकार एस. ने कहा कि साल 2025 मांग में गिरावट का नहीं, बल्कि पुनर्संयोजन का वर्ष रहा. खरीदार सक्रिय रहे लेकिन अधिक सोच-समझकर निर्णय लिए गए. डेवलपर ने आपूर्ति को अनुशासित ढंग से प्रबंधित किया. यही वजह है कि कम बिक्री के बावजूद कीमतें स्थिर बनी रहीं. शहरों के हिसाब से देखा जाए तो दक्षिण भारत के तीन शहरों में बेहतर आपूर्ति एवं मजबूत मांग के दम पर अच्छा प्रदर्शन दिखा.
क्यों कम हुई प्रॉपर्टी की बिक्री
- कीमतों में उछाल : पिछले साल देश के 8 प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें 6 से 19 फीसदी तक बढ़ी. दिल्ली एनसीआर में सबसे ज्यादा, हैदराबाद में 13 फीसदी. इससे किफायती घरों की बिक्री 17 फीसदी गिरी और पूरे सेक्टर पर असर पड़ा.
- नौकरियों में छंटनी : साल 2025 में आईटी और टेक सेक्टर में बड़े पैमाने पर छंटनी हुई. खासकर बैंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में इसका असर दिखा. इससे पर्चेजिंग पॉवर घटी और होम लोन लेने की क्षमता में कमी आई.
- भूराजनैतिक तनाव : ग्लोबल मार्केट में टैरिफ वॉर और भूराजनैतिक तनाव की वजह से निवेशकों और खरीदारों में सतर्कता बढ़ी जिससे रियल एस्टेट सेक्टर की डिमांड पर असर दिखा.
- सेग्मेंट में बदलाव : रियल एस्टेट की लागत बढ़ने की वजह से डेवलपर्स अब किफायती प्रोजेक्ट कम लॉन्च कर रहे हैं, जिससे मकानों की बिक्री की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन कीमतों के मोर्चे पर स्थिरता दिख रही है.





